मेरी प्यारी बहन का प्यार

Meri pyari bahan ka pyar:

Hindi sex kahaniyan, antarvasna मुझे सुभाष कहने लगे मैं तुम्हें लखनऊ छोड़ देता हूं कुछ दिनों के लिए तुम अपने मम्मी पापा के पास हो आओ। मैंने सुभाष से कहा लेकिन मैं लखनऊ नहीं जाना चाहती तो सुभाष मुझे कहने लगे तुम कुछ दिनों के लिए अपने मम्मी पापा के पास चली जाओ तुम्हें अच्छा लगेगा और अपने साथ बच्चों को भी ले जाना। कुछ दिनों से सुभाष और मेरे बीच में कुछ ठीक नहीं चल रहा था इसलिए सुभाष चाहते थे कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली जाऊं जिससे कि हम दोनों के रिश्ते पहले जैसे हो पाए। इसी के चलते उन्होंने मुझे लखनऊ भेजने का फैसला कर लिया था लेकिन मैं लखनऊ जाने के लिए तैयार नही थी मैं चाहती थी कि मैं सुभाष के साथ रहूं परंतु सुभाष ने मुझे लखनऊ भेजने का पूरा फैसला कर लिया था तो भला मैं उनकी बात को कैसे टाल सकते थी और आखिरकार मैं अपने मायके चली गयी।

मैं अपने साथ अपने बच्चों को भी ले गई लेकिन मुझे घड़ी-घड़ी सुभाष की चिंता सताए जा रही थी और मुझे सुभाष की बहुत याद आ रही थी। काफी समय से हम दोनों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था जिस वजह से मेरे और सुभाष के बीच झगड़े भी होने लगे थे। हमारी शादी को 12 वर्ष हो चुके हैं और इन 12 वर्षों में सुभाष और मेरे झगड़े  काफी बढ़ चुके हैं मैं लखनऊ में भी सुभाष को ही याद कर रही थी। मेरी छोटी बहन जोकि बड़ी चुलबुली और शरारती है उसका नाम मीनाक्षी है मीनाक्षी मुझसे कहने लगी दीदी लगता है आपको जीजाजी की याद आ रही है। मैंने मीनाक्षी से कहा लेकिन तुम्हें कैसे पता कि मुझे तुम्हारे जीजा जी की याद आ रही है वह मुझे कहने लगी दीदी मुझे सब पता है कि आप जीजा जी को कितना मिस कर रही हैं। मीनाक्षी ने मुझे छेड़ते हुए कहा मैंने देख लिया था जब आप जीजा जी की तस्वीर को अपने कमरे में बैठकर निहार रही थी। मेरे पापा मम्मी ने मेरे रूम को आज भी वैसा ही सजा रखा है जैसे पहले मैं अपने रूम को रखती थी मेरे रूम में वह किसी को भी नहीं जाने देते।

मेरे पिताजी एक बड़े अधिकारी हैं इसलिए उन्होंने हम दोनों बहनों को हमेशा अच्छी शिक्षा और एक अच्छा माहौल दिया जिस वजह से हम दोनों बहने भी अपनी अच्छी पढ़ाई कर पाए। मीनाक्षी मुझे कहने लगी दीदी मुझे मालूम है आप जीजा जी को कितना मिस कर रही है लेकिन मुझे मां ने बताया कि आप दोनों के बीच कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा है इसलिए आप घर आई हो। मैंने मीनाक्षी को कहा मीनाक्षी कुछ समय से मेरे और सुभाष के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था जिस वजह से सुभाष ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारे मां के भेज देता हूं लेकिन मुझे घर आकर भी ऐसा लग रहा है जैसे की मैं सुभाष से बहुत दूर हूं और मुझे एहसास हो रहा है कि सुभाष के बिना मैं बिल्कुल भी नहीं रह सकती। तभी मेरी छोटी बहन मीनाक्षी ने मुझे कहा दीदी आपको और जीजाजी को इस बारे में बैठ कर बात करनी चाहिए। मैंने मीनाक्षी से कहा हां मैं सोच तो रही थी कि मैं तुम्हारे जीजा जी से बात करूं लेकिन उनके पास समय ही कहां होता है वह तो अपनी बैंक की नौकरी में ही उलझे रहते हैं। सुभाष बैंक में मैनेजर हैं और वह हमेशा ही अपने काम की वजह से तनाव में रहते हैं मैं और मीनाक्षी बात कर रहे थे तभी मेरी मां कमरे में आई और कहने लगी तुम दोनों खाना खा लो मैंने तुम्हारे लिए खाना बना दिया है। मैंने मां से कहा लेकिन तुमने क्यों खाना बनाया मेरी मां कहने लगी इतने दिनों बाद तुम आई हो तो क्या मैं खाना भी नहीं बना सकती अभी मैं इतनी भी बूढ़ी नहीं हुई हूं कि मैं तुम्हारे लिए खाना ना बना सकूं। मैं और मेरी मां खाना खाते वक्त भी बात कर रहे थे हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे मेरे खाने की बिल्कुल भी अच्छा नहीं हो रही थी इसलिए मैंने थोड़ा सा ही खाना खाया। मेरे दोनों बच्चों ने खाना खा लिया था और वह सो चुके थे मीनाक्षी और मैं कमरे में बैठे हुए थे तभी मीनाक्षी ने मुझे अपने मोबाइल पर एक लड़के की तस्वीर दिखाई मीनाक्षी कहने लगी दीदी मैं आपको कुछ बताना चाहती हूं। मैंने मीनाक्षी से कहा आखिर यह लड़का कौन है तो मीनाक्षी ने मुझे बताया कि यह आकाश है और आकाश के साथ पिछले एक वर्ष से मैं प्रेम संबंध में हूं मैं आकाश से प्यार करती हूं।

मैंने मीनाक्षी से कहा तो क्या तुमने इस बारे में पापा को बताया मीनाक्षी कहने लगी नहीं दीदी अभी तक मैंने किसी को भी नहीं बताया है क्योंकि अभी आकाश मेरे साथ कॉलेज में ही पढ़ाई कर रहा है और आकाश चाहता है कि पहले वह नौकरी कर ले उसके बाद ही पापा से आ कर बात करेगा। मैंने मीनाक्षी से पूछा कि आखिरकार आकाश के माता-पिता क्या करते हैं मीनाक्षी कहने लगी उसके पिताजी स्कूल में क्लर्क हैं और आकाश की दो बहने भी हैं। मैंने मीनाक्षी को कहा कि क्या पिताजी इस रिश्ते के लिए मान जाएंगे मीनाक्षी कहने लगी दीदी मुझे इस बारे में पता नहीं है कि पिताजी इस बारे में मानेंगे या नहीं लेकिन मैं आकाश से बहुत प्यार करती हूं और आकाश के बिना मैं बिल्कुल भी नहीं रह सकती। मैंने मीनाक्षी को समझाया और कहा देखो मीनाक्षी यह प्यार व्यार कुछ नहीं होता है तुम मुझे ही देख लो मैं प्यार को लेकर बिल्कुल भी सकारात्मक नहीं थी क्योंकि सुभाष और मेरे बीच में भी शादी के दो-तीन वर्षों तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन जैसे-जैसे शादी को समय होता चला गया वैसे ही हम दोनों के भी संबंध कुछ बदलता चला गया और अब  सुभाष और मेरे बीच में बिल्कुल भी प्यार नहीं रह गया है।

मैं और सुभाष अब पूरी तरीके से बदल चुके हैं और मुझे नहीं लगता कि अब हम दोनों के बीच पहले जैसा कुछ प्यार रह गया है। मीनाक्षी को जब मैंने यह बात समझाई तो मीनाक्षी कहने लगी दीदी मेरे और आकाश के बीच ऐसा कुछ भी नहीं होगा हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। मुझे लगता था कि मीनाक्षी मेरी बात समझ जाएगी लेकिन मीनाक्षी की अभी उम्र कम है और उसे इस बात के बारे में भी पता नहीं है कि जैसे ही उसकी शादी आकाश के साथ होगी तो उनके बीच में भी सब कुछ बदलता चला जाएगा। मेरे और सुभाष के बीच पहले सब कुछ ठीक चल रहा था हम दोनों एक दूसरे को समय भी दिया करते थे लेकिन अब हम दोनों के पास जैसे एक दूसरे के लिए समय ही नहीं था। मैं बच्चों की देखभाल में ही लगी रहती थी और आकाश अपने काम से ही समय नहीं निकाल पाते थे इसलिए हम दोनों के बीच दूरियां बढ़ती चली गई और दूरियां हमारे बीच काफी हो चुकी थी। मैंने कई बार इस बारे में सुभाष से बात भी की थी लेकिन सुभाष से इस बारे में बात करना अब व्यर्थ हो चुका था वह कुछ भी समझते नहीं है। मैं भी अपने मायके में थी और मैं सुभाष का इंतजार करने लगी कि वह मुझे लेने के लिए कब आएंगे लेकिन सुभाष को थोड़ा समय चाहिए था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि सुभाष को मुझसे क्या तकलीफ होने लगी है लेकिन इसी बीच आकाश से मेरी मुलाकात हुई। मुझे आकाश एक अच्छा लड़का लगा मैंने मीनाक्षी से कहा आकाश अच्छा लड़का है तुम्हे उससे शादी कर लेनी चाहिए। मेरी सोच पूरी तरीके से आकाश के प्रति बदल चुकी थी आकाश भी मेरी बड़ी इज़्ज़त करने लगा वह मीनाक्षी से मेरे बारे में हमेशा कहता कि तुम्हारी दीदी बहुत अच्छी हैं। एक दिन मैंने मीनाक्षी और आकाश की नग्न अवस्था में फोटो देख ली मैंने मीनाक्षी के फोन को टटोलना शुरू किया तो उसमें मीनाक्षी और आकाश के कुछ अंतरंग संबंधों की कुछ तस्वीरें कैद थी।

मैंने जब यह बात मीनाक्षी से की तो मीनाक्षी घबरा गई और कहने लगी यदि आपने यह बात किसी को बता दी तो मैं किसी से नजर भी नहीं मिला पाऊंगी इसलिए आप किसी को मत बताना। मीनाक्षी की आंखों में अब डर था लेकिन मैंने किसी को भी यह बात नहीं बताई परंतु आकाश के प्रति मेरा आकर्षण और भी बढ़ने लगा था। आकाश भी हमारे घर पर आने लगा था इसी बीच एक दिन आकाश घर पर आया हुआ था तो वह मीनाक्षी के साथ रूम में था। मीनाक्षी और आकाश के बीच चुंबन हो रहा था मैंने यह सब देख लिया आकाश भी घबरा गया जैसे ही आकाश ने मीनाक्षी से दूरी बनाई तो मीनाक्षी कमरे से बाहर उठ कर चली गई। मैं आकाश के बगल में जा कर बैठी मैंने आकाश से कहा तुम्हारे और मीनाक्षी के संबंधों के बारे में मुझे सब मालूम है आकाश घबरा गया और कहने लगा आप किसी से तो नहीं कहेंगी। मैंने आकाश से कहा मैं किसी से नहीं कहूंगी लेकिन तुम्हें भी मेरी बात माननी पड़ेगी इसी के चलते मैंने आकाश को अपने साथ सेक्स करने के लिए राजी कर लिया। आकाश ने भी मेरे पूरे बदन को चाटना शुरु किया जब उसने मेरी योनि पर अपनी जीभ को लगाया तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई।

मेरी योनि से अब गीलापन बाहर निकल रहा था आकाश ने मेरी चूत को चाटना शुरु किया जैसे ही उसने अंदर की तरफ अपने लंड को धकेलते हुए घुसाया तो मैं चिल्ला उठी। इतने समय बाद किसी के लंड को अपनी योनि मे लेकर एक अलग फीलिंग पैदा हो रही थी और सेक्स के प्रति मेरी रुची बढ़ रही थी। सुभाष के साथ ना जाने कब से मैंने अच्छे से संबंध भी स्थापित नहीं किए थे लेकिन आकाश मुझे बड़ी तेज गति से धक्के दिया जाता मेरी योनि से फच फच की आवाज निकलने लगी थी। मेरी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकाल आया था जिससे कि मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। जैसे ही आकाश ने अपने वीर्य को मेरी योनि के ऊपर गिराया तो मैंने आकाश से कहा तुमने मेरी योनि के अंदर अपने वीर्य को क्यों नहीं गिराया? आकश कहने लगा मुझे डर था कहीं कुछ गलत ना हो जाए। मैंने आकाश से कहा तुम्हें मेरे साथ सेक्स संबंध बनाने पड़ेंगे। आकाश ने भी अपने लंड को मेरी योनि में डाल दिया और आकाश और मेरे बीच करीब 5 मिनट तक दोबारा सेक्स संबंध बने। मुझे आकाश के साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आया और आकाश ने भी मेरी चूत छील कर रख दी थी।


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