बाप ने बेटी को चोदा भाग २

अब्बा ने कहा – कुछ नहीं होगा. तेरी मालिश कर देता हूँ. जरा अपनी नाइटी ऊपर तो कर
मैंने कहा – ठीक है अब्बा.

कह कर मैंने अपनी नाईटी को अपनी चूची के ऊपर तक उठा दिया . अब मेरी नंगी चूची सीधे उनके छाती से सट रही थी . अब्बा ने पीठ को इस तरह से दाबना शुरू किया कि वो मुझे अपनी तरफ सटाने लगे . जिस से मेरी चूची उनके छाती में दब रही थी . इधर मेरी बुर उनके कमर पर सट रही थी . अब्बा पर वियाग्रा का असर हो चुका था .

उन्होंने कहा – सुन, तू अपने ये कपडे पूरी तरह उतार .मै अच्छी तरह से मालिश कर देता हूँ.
मैंने वो नाइटी को अपने सर होते हुए निकाल दिया . अब मै पूरी तरह से नंगी थी . अब्बा ने एक हाथ से मुझे लपेटा और अपने शरीर पर मुझे लिटा दिया . उन्होंने मेरी पीठ से ले कर गांड को इतनी जोर से दबाने लगे कि मै उनकी देह में बिलकूल चिपक सी गयी. वो कभी मेरी पीठ दबा रहे थे तो कभी मेरी चुत्तद. मेरी चूची उनके सीने में दब कर पकोड़ा हो रही थी. मै उनके मज़बूत पकड़ में थी . मैंने अपने बुर को उनके खड़े लंड पर टिका रखा था .

तभी उन्होंने मुझे अपने नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर जोर जोर से मेरी गालों को चूमने लगे. मैंने सिर्फ उनका साथ दे रही थी. उनका लंड मेरी चूत पर किसी राड कि तरह चुभ रहा था. पता नहीं क्यों मेरे अब्बा ने अभी तक अपनी लुंगी नही खोली थी . शायद उन्हें अभी भी ये अहसास हो रहा था कि वो मेरी बेटी है. वो मेरी गाल से ले कर मेरी कमर तक के हर भाग को मुंह से चूस रहे थे मानो किसी भूखे शेर को कई दिन के बाद ताज़ा गोश्त खाने को मिला हो. मैंने भी उनका साथ देना चालु कर दिया.

थोड़ी देर बाद ही वो मेरे कमर पर हाथ फेरते फेरते मेरी दोनों टांगो को अगल बगल फैला लिया जिस से मेरा बुर उनके सामने आ गया. अब उनका हाथ मेरी कमर के नीचे से होते हुए मेरी बुर को छूने लगा. अब्बा मेरी मेरी बुर के बालों को सहलाने लगे.
धीरे से बोले – ज़रीना, तू तो जवान हो गयी है रे.

वो मेरी बुर को हथेली से सहलाने लगे. मेरी बुर से पानी गिर रहा था जो कि उनके हाथ में लग रहा था. उनसे और नहीं रहा जाने लगा तो वो मेरे चूत को चूमने लगे. मै समझ गयी की लोहा गरम होगया है. अब्बा ने मेरी चूत में जीभ डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगी. मुझसे ज्यादा देर बर्दास्त नहीं हुआ और मैंने पानी छोड़ दिया. अब्बा ने बड़े मज़े से मेरे बुर के पानी को चाटने लगे .

थोडा संभलने के बाद मैंने एक हाथ से उनके लंड को लुंगी के ऊपर से ही पकड़ा . उनका लंड लुंगी के नीचे काफी बड़ा हो गया था. जब मैंने देखा की अब्बा को लंड छुआने में कोई दिक्कत नहीं है तो मैंने लुंगी के अन्दर हाथ डाला और उनके लंड को पकड़ लिया . अब्बा ने एक झटके में अपनी लुंगी खोल दिया. अब वो पूरी तरह नंगे थे. अब्बा का लंड बहूत बड़ा था. मै उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी . अब्बा की साँसे गर्म होने लगी . मैंने सोचा कि यही सही मौक़ा है अब्बा से सौदा करने का. वो मेरी चूची को चूस रहे थे.
अब्बा ने कहा – जरीना, तू तो एकदम मस्त हो गयी है. मन करता है तेरी चूत को चोद डालूं.

मैंने कहा – अब्बा, ये शरीर आपका ही दिया हुआ है. आपका मेरे बदन पर पूरा हक है. आपका दिया खाती हूँ, आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं मेरे साथ. अम्मा के जाने के बाद मेरा फ़र्ज़ है कि आपके लिए मै कुछ भी करूँ.

अब्बा ने कहा – ज़रीना, ज़रा लाईट तो जला दे, ज़रा देखूं तो तेरा बदन कितना जवान हुआ है ?.
मैंने कहा – अब्बा, लाईट जलाने पर बाहर भी रौशनी जायेगी . मोमबत्ती जलाती हूँ . इसमें काम हो जाएगा .

वहीँ पर मोमबत्ती और माचिस रखी हुई थी . मैंने मोमबत्ती जलाई . मोमबत्ती जलते ही हम दोनों ने एक दुसरे के शरीर को निहारना शुरू किया . अब्बा मेरी दुबली पतली काया और उस पर बड़े बड़े चुचियों और मेरे बुर को एकटक निहार रहे थे . और मै उनके तने हुए लंड को देख कर अंदाज़ लगा रही थी कि इसे अपनी बुर में झेल पाऊँगी या नहीं .मोमबत्ती को एक जगह रख कर मै अब्बा कि गोद में जा कर उनसे लिपट गयी . अब्बा ने मुझे कुछ उंचा किया और मेरी एक चूची को चूसने लगे.
बोले – तेरी चूची तो काफी मीठी है ज़रीना.

मुझे काफी मज़ा आ रहा था . कुछ देर चूची को चूसने के बाद वो लेट गएऔर बोले – मेरे मुह पर अपनी बुर को रख .
मैंने ऐसा ही किया . मै उनके मुह पर बैठ गयी . मैंने अपने बुर को उनको मुंह में घुसा दिया . वो मेरी बुर को खाने कि कोशिश कर रहे थे . मेरे बुर से दुबारा रस निकलने लगा . वो रस को ऐसे चाट रहे थे मानो कोई शहद हो .
अब्बा बोले – एकदम नमकीन रस है तेरे बुर का.

उसके बाद उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरी दोनों टांगो को फैला दिया . वो बुर को फिर से चाट रहे थे . और मेरी बुर में अपनी जीभ घुसा दिया . मुझे उत्तेजना से अजीब लग रहा था . मुझे कुछ हो रहा था . मेरे बुर से रस के साथ साथ पिशाब भी निकलने लगा . लेकिन अब्बा ने मेरे बुर में से अपनी जीभ नहीं निकाली . वो मेरे पिशाब को भी चूसते रहे.
थोड़ी देर के बाद मैंने कहा – अब्बा अब मेरे बुर को और मत चूसिये .

अब्बा ने बुर में से जीभ निकाल दिया . मेरे बदन पर लेट गए और
बोले – रानी बेटा, तू तो एकदम मस्त माल है. सारा बदन मखमल के तरह है. जहाँ चूसता हूँ वहां रस ही रस है. अब तू मेरे से चुदवायेगी ? तुम्हे डर तो नहीं लगेगा न बेटा? बहूत आराम से चोदुंगा. मज़ा आयेगा तुझे. अब चुदाई के लिए तैयार हो जा .


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